प्रेमानंद जी महाराज: इस विषय पर पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज ने अपने सत्संग में अद्भुत और सरल उत्तर दिया है। उन्होंने बताया कि नाम जप ऐसा दिव्य उपाय है जो केवल अगले जन्म के लिए नहीं, बल्कि इस वर्तमान जीवन में भी तत्काल प्रभाव देता है।
आध्यात्मिक जीवन में अक्सर यह सवाल उठता है—
“क्या इस जन्म में नाम जप और अच्छे कर्मों का फल मिलेगा या अगले जन्म में?”✨ क्या कहते हैं प्रेमानंद महाराज जी?
✨ क्या कहते हैं प्रेमानंद महाराज जी?

प्रेमानंद जी ने स्पष्ट कहा—
“अगले जन्म की बात नहीं है। नाम जप वर्तमान में ही दुख सहने की क्षमता देता है, पुराने संचित कर्मों को भस्म करता है और नए कर्मों को पवित्र बनाकर उनका विनाश करता है।”
यानी—
नाम जप कल नहीं, आज बदलता है।
✨1. संचित कर्मों का नाश करता है नाम जप
हमारे कई जन्मों के जो कर्म अभी प्रारब्ध नहीं बने हैं, उन्हें संचित कहा जाता है।
महाराज जी बताते हैं कि—
नाम जप संचित पापों को भस्म कर देता है
पुराने जन्मों से बंधी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है
मन शुद्ध होने लगता है
✨2. प्रारब्ध को भोगने की शक्ति देता है
प्रारब्ध यानी वे कर्म जिनका फल इस जन्म में भोगना तय है।
इन्हें मिटाना संभव नहीं, लेकिन नाम जप—
दुख को सहने की अद्भुत शक्ति देता है
जीवन में आने वाले कष्टों को हल्का करता है
मन को स्थिर और प्रसन्न बनाता है
इसलिए भक्त कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराते रहते हैं।

✨3. वर्तमान कर्मों को पवित्र करता है
हम जो अभी-अभी कर्म कर रहे हैं, उनमें भी त्रुटियाँ हो सकती हैं।
महाराज जी कहते हैं:
नाम जप नए दोषों को भी मिटा देता है
गलतियों को पवित्र कर्म में बदल देता है
मन में पवित्रता, शांति और आनंद लाता है
✨ 4. जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाता है
नियमित नाम जप—
मन को दिव्य आनंद देता है
भगवत प्राप्ति का सरल मार्ग बनाता है
जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर देता है
यही कारण है कि संत लोग नाम को कलियुग की सबसे बड़ी दवा कहते हैं।
निष्कर्ष
नाम जप का फल अगले जन्म में ही मिलेगा—यह भ्रम है।
नाम जप:
संचित पाप नष्ट करता है
वर्तमान दुख सहने की क्षमता देता है
आगे होने वाली गलतियों को रोकता है
मन को आनंद से भर देता है
और मोक्ष का मार्ग खोल देता है
अतः नाम जप का परिणाम यहीं, इसी जीवन में दिखाई देता है।
FAQ:
1. क्या नाम जप से तुरंत फल मिलता है?
हाँ, मन की शांति और नकारात्मक विचारों का अंत तुरंत अनुभव होने लगता है।
2. क्या प्रारब्ध को मिटाया जा सकता है?
नहीं, लेकिन नाम जप उसे सहने की शक्ति देता है।
3. क्या संचित पाप सच में नष्ट होते हैं?
प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि नाम जप संचित पापों को भस्म कर देता है।
4. क्या नाम जप मोक्ष दिलाता है?
हाँ, यह भगवत-प्राप्ति और जन्म-मरण से मुक्ति का सरल मार्ग है।
5. दिन में कितना नाम जप करना चाहिए?
आवश्यकता के अनुसार—सुबह-शाम कम से कम 10–20 मिनट लाभकारी है।