एक भक्त का प्रेमाननद महाराज श्री से प्रश्न : राधे-राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। महाराज जी बहुत ज्यादा सोचने लगता हूं। डर सा लगता है। अपने आप को शांत करने के लिए घबरा जाता हूं।
प्रेमाननद महाराज श्री उत्तर देते हैं :
एक भक्त का प्रेमाननद महाराज श्री से प्रश्न :
🌸“राधे-राधे महाराज जी! आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम।
महाराज जी, मैं बहुत ज़्यादा सोचने लगता हूँ। डर सा लगता है।
अपने आप को शांत करने की कोशिश करता हूँ, लेकिन और घबरा जाता हूँ।”
प्रेमाननद महाराज श्री उत्तर देते हैं :
🌼 प्रेमानंद महाराज श्री का उत्तर
महाराज श्री कहते हैं :
“टाइम क्यों देते हो सोचने का? टाइम क्यों देते हो?
राधा-राधा सोचो, जिससे लोक और परलोक — दोनों मंगल होंगे।
तुम्हारे सोचने से होगा क्या?
राधा-राधा, राधा-राधा…
सामने जो कर्तव्य आया है, उसे धैर्यपूर्वक और एकाग्रता से करो।
सोचने वाले विभाग में सोच डाल दो — ‘राधा-राधा-राधा’।
तुम्हारे सोचने से कुछ बन या बिगड़ थोड़ी जाएगा!
राधा-राधा जपो। अब जो बनेगा, वही तुम्हारे लिए शुभ होगा,
और जो बिगाड़ना चाहेंगे, वही बिगड़ जाएंगे।
फालतू समय क्यों नष्ट करते हो? यह मूर्खता है।
अगर हम आगामी भविष्य, भूत या वर्तमान का चिंतन करके
अपने प्रियतम को भूल रहे हैं, तो यह बहुत बड़ी मूढ़ता है।
होगा वही, प्यारे, जो निश्चित हो चुका है।
अब उस निश्चय को अगर कोई टाल सकता है,
तो वो एक महान शक्ति है — राधा राधा राधा राधा!
अब क्या होगा आगे? वही होगा जिसमें हमारा परम मंगल होगा।
हम शरणागत हैं — राधा राधा!
कदम आगे बढ़ाओ। पीछे जो हुआ था, वो सब भस्म हो जाएगा।
अगर आगे कोई गड़बड़ भी हो, तो वह हाथ पकड़ लेगी —
गड़बड़ कैसे करने देगी?
राधा राधा राधा राधा!
अगर तुमने इस सोच को खुला छोड़ दिया,
तो यह तुम्हें डिप्रेशन में पहुंचा देगी।
बेमतलब के भय, बेमतलब के संशय —
ये धीरे-धीरे तुम्हारी शक्ति को कमजोर कर देंगे।
फिर एक दिन ऐसा आएगा कि दवाइयाँ खानी पड़ेंगी।
ऐसा मत होने दो!
यह बहुत कीमती समय है, बहुत कीमती जीवन है।
इसे अच्छे कामों में लगाओ।
उत्साही पुरुष सब कुछ कर सकता है,
लेकिन निरुत्साहित व्यक्ति — चाहे कितना भी बलवान हो —
किसी काम का नहीं रहता।
वर्तमान के कर्तव्य पर पूरी दृष्टि रखो।
नाम जप चल रहा हो, तो किसी भी निराशा को छूने मत दो।
हर क्रिया, हर कर्तव्य का ज्ञान रखो।
मनमानी आचरण नहीं करना चाहिए।
सोचो — यह कार्य ठीक है या नहीं? इसका परिणाम क्या होगा?
व्यापार करो, नौकरी करो — जो भी कार्य करो —
उसे ठीक से करो। सफलता-असफलता प्रभु के हाथ में है।
कर्तव्य तुम ठीक से करो।
अगर नाम जप करोगे, कर्तव्य का पालन करोगे,
हर समय आनंदित और उत्साहित रहोगे,
तो जीवन मंगलमय रहेगा।
शरीर छूटेगा तो प्रभु के पास जाओगे।
खेल ऐसा खेलो जिसमें घाटा न हो!
नाम जप चल रहा है तो कोई बाधा तुम्हें परास्त नहीं कर सकती।
लेकिन अगर नाम जप नहीं हो रहा —
तो सब व्यर्थ, विनाशी और चिंताजनक हो जाता है।
समय नष्ट हो रहा है और लाभ कुछ नहीं मिल रहा।
इसलिए संयम से रहो, व्यायाम करो, भजन करो, सत्संग सुनो,
सबको सुख पहुँचाने की भावना रखो।
तब तुम कमल की तरह खिले रहोगे —
‘मुख प्रसन्न, तन तेज विराजा; कीन्हेसि रामचंद्र कर काजा।’
क्योंकि धर्म से चल रहे हो।
वासना से प्रेरित होकर शरीर, बुद्धि, मन और जीवन को नष्ट मत करो।
यह मुर्दे जैसा जीवन है —
जहाँ इंद्रियाँ जैसा चाहें, वैसा हमें नचाती रहें।
थोड़ा साहसी बनो!
तुम भगवान के अंश हो।
तुम कुछ भी कर सकते हो —
बुरा से बुरा, भला से भी भला।
बुरा कर्म का परिणाम बुरा होता है,
भले का परिणाम भला होता है।
इसलिए आगे बढ़ो — भलाई की ओर!
भगवान के अंश हो, तो फिर इतना छोटा मन क्यों रखते हो?
थोड़ा दुख आया — रो दिए।
थोड़ी खुशी मिली — नाच दिए।
अगर नाचना है, तो ऐसी हिम्मत में नाचो
कि भारी से भारी दुख में भी नाचना बंद न हो।
और अगर रोना है, तो केवल प्रभु के लिए रोना।
झुकना है, तो केवल भगवत-भाव में झुकना।
हमको कोई रौंद नहीं सकता, कोई झुका नहीं सकता।
हम भगवान के अंश हैं। थोड़ा तो समझो यार!
हम सब जरा-जरा सी बातों में ऐसे —
क्षणे रुष्टा, क्षणे तुष्टा —
थोड़ा मिला तो फूल गए, थोड़ा गया तो रो दिए।
ये हमारा जीवन है?
एक गंभीर स्वभाव बनाओ,
एक उत्तम विचार बनाओ,
और एक उत्तम कार्य में रत रहो।
फिर देखना — जीवन में चमत्कार आने लगेंगे।
बात समझो — बाहरी आशीर्वाद से कुछ नहीं होता।
फल दे दिया, तुम खुश हो गए — ये स्थायी नहीं है।
अगर संत की “बात पकड़ लोगे”,
तो जन्म-जन्मांतर तुम्हें ऊँचा उठाती जाएगी।
हो सकता है अगला जन्म ही न हो!
संतों की बातें ही सच्चा आशीर्वाद हैं।
आजकल हम बाहरी दिखावे को ज़्यादा मानते हैं।
लेकिन अगर बात पकड़ ली — तो विश्व पर विजय पा लोगे।
जो अपने मन और इंद्रियों पर विजय पा गया,
वही सच्चा विजेता है।
और जिसने विश्व को जीत लिया,
पर मन और इंद्रियों को नहीं — वह हारा हुआ है।
निराश होने के लिए मानव शरीर मिला है क्या?
पशु हैं हम?
नहीं!
हम भूखे रहकर भी, कष्ट सहकर भी मुस्कुरा सकते हैं,
क्योंकि हमारे पास ज्ञान है, भगवान का बल है।
किसी व्यर्थ सोच में मत बहते चले जाओ।
उसको ब्रेक लगाओ!
वह तुम्हारे अधीन है — तुम उसके नहीं।
जागो! अभी सो रहे हो।
अंदर के शत्रु तुम्हें परेशान कर रहे हैं।
क्या तुमने उन्हें कभी पहचाना?
नहीं, उन्हें अपना मान बैठे हो।
मन कहता है — होटल चलो — तुम चल देते हो।
मन कहता है — फिल्म देखो — तुम मान लेते हो।
मन कहता है — गलत दृष्टि डालो — तुम कर लेते हो।
कभी सोचा, यह मन तुम्हारा मित्र है या शत्रु?
अंदर बैठा दुश्मन पहचानो।
उसे जीत लोगे तो निहाल हो जाओगे।
पूरा जगत जीत लोगे, परमानंद में मग्न हो जाओगे।
हर व्यक्ति के हृदय में इतना आत्मबल है
कि वह सब कुछ सह सकता है।
वो आत्मबल क्यों नहीं जगाते?
यह सोच कि “वो कर सकते हैं, मैं नहीं,”
यही सबसे बड़ी भूल है।
क्यों नहीं कर सकते तुम?
हर स्थिति — चाहे लौकिक हो या आध्यात्मिक —
तुम्हारे लिए बनी है।
बस तुम तैयार नहीं हो।
जैसे भारत का हर नागरिक हर पद पर बैठ सकता है,
वैसे भगवान का हर बालक हर ऊँचाई तक पहुँच सकता है।
थोड़ा आगे बढ़ो, नाम जप करो, धर्म से चलो।
सुबह उठो जल्दी, व्यायाम करो।
शरीर जवान है, इसे व्यर्थ मत जाने दो।
हमारे नौजवान भाई बहुत भूल में जा रहे हैं —
मदिरा पीना, नशा करना, व्यभिचार करना
अब मनोरंजन बन गया है।
यह जीवन का सबसे घातक विषय है।
यह तुम्हारी लौकिक और पारलौकिक
दोनों उन्नतियों को नष्ट कर देगा।
इसलिए हम बार-बार चेतावनी देते हैं —
यही समय है जो तुम्हें महान बना सकता है।
संयम से रहो।
जब तक विवाह न हो, ब्रह्मचर्य रखो।
कोई नशा मत करो।
धैर्यपूर्वक विचार करो।
यह जीवन बर्बाद करने के लिए नहीं है।
उन दोस्तों से दूर रहो जो तुम्हें गंदी आदतें सिखाते हैं,
जो धर्म, माता-पिता और गुरु को रौंदने पर मजबूर करते हैं।
हमारा सच्चा मित्र श्रीकृष्ण हैं।
जिसका मित्र श्रीकृष्ण है, वह कभी परास्त नहीं होता।
अर्जुन परास्त हुआ क्या? नहीं!
क्योंकि उसके सारथी स्वयं श्रीकृष्ण थे।
आपका जीवन मंगलमय हो।
आप तेजस्वी, स्वस्थ, धर्मनिष्ठ बनें।
आप भारत देश का भविष्य हैं।
ऐसा आचरण करें कि देखकर सबको प्रेरणा मिले।
आपका एक उत्तम जीवन पूरे भारत को सुख दे सकता है।
अगर एक घर, एक व्यक्ति सुधर जाए,
तो भारत का हित आरंभ हो जाता है।
आप सब जवान हैं — कोई अधिकारी बनेगा, कोई प्रवक्ता, कोई नेता।
आपका जीवन धर्म से जुड़ा रहे, यही हमारा आशीर्वाद है।
संयम रखो, विवेक से चलो,
नाम जपो, धर्म से जुड़ो,
और अपने जीवन को सफल बनाओ।
राधे राधे!